Jai Mata Di

Pavitra Surya Kundali

मानव कितना ही महान विद्वान व अध्ययनषील क्यों न हो, वह ईष्वर तो क्या देवताओं की भी बराबरी नहीं कर सकता। संसार का लगभग सभी ज्ञान समय-समय पर देवताओं व ऋषि-मुनियों द्वारा अपने-अपने तरीके से प्रकट किया गया है। मानव के ज्ञान की सीमाएं सीमित है। यही कारण है कि देवताओं द्वारा प्रकट किए गए ज्ञान का किसी एक ही मुख्य धारा को लेकर उसका विवेचन व विष्लेषण प्रत्येक ऋषि-मुनियों, आचार्य व विद्वानों ने किया। जबकि अन्य धाराओं को प्रायः छोड़ ही दिया। यही कारण है कि ज्योतिष का प्राचीन दुर्लभ ज्ञान भी कई धाराओं में विभक्त हो गया। ज्योतिष का सम्पूर्ण संसार इतना विस्तृत है कि इसकी चर्चा किसी भी बड़े से बड़े ग्रंथ में करना संभव नहीं है। क्योकि ज्योतिश शास्त्र के बारे मे बात भी कर पाना सागर को गागर मे भरने के समान है! लेकिन इसी धारा को धाराप्रवाह करते हुए भारत देश के महान नही बल्कि महानत गुरू श्री पारस भाई जी ने एक ऐसा रास्ता निकाला जिस पर चल कर हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म का क्यो न हो! वह जीवन के दुखो को छोडकर हसता मुस्कुराता जीवन के आन्नद की तरफ बढता जाता है! और अपनी चाहत को हासिल करता है! क्योकि पारस भाई जी ने भाग्य को चन्द कागज के पेजो पर इस तरह से गुरेद दिया कि जाने वह हर व्यक्ति का आईना हो!! और पारस भाई जी ने समाज कल्याण के लिए पवित्र सूर्य कुण्डली का निर्माण कर लाखो दिलो के दुखो को सुखो मे परिवर्तित किया!! और पवित्र सूर्य कुण्डली स्वयं ‘‘परम पूज्य पारस गुरूजी’’ द्वारा बनाई गई है। पवित्र सूर्य कुण्डली में केवल सूर्य के आधार पर ही सभी गणनाएं की जाती है। यू तो प्रत्येक मनुष्य के जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक निम्नलिखित व निम्न प्रकार के दुख है। जैसेः- विद्या, केरियर, नौकरी, व्यापार, विवाह, संतान, बुढापा और बीमारियाँ आदि। और जीवन के इन्ही दुःखों को देखते हुए ‘पूज्य श्री पारस भाई गुरूजी’ ने पवित्र सूर्य कुण्डली मनुष्यों को उनके दुःखों से निजात पाने के लिए बनाई है। पवित्र सूर्य कुण्डली सूर्य को ही आधार मानकर बनाई गई है क्योकि सूर्य व्यक्ति के शरीर, सफलताओं, धन-वैभव और मान-सम्मान पर सभी ग्रहों से अधिक असर डालता है और सूर्य की कृपा के वगैर किसी भी प्रकार के मंगल की कल्पना मिथ्या है। पृथ्वी सहित अन्य सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते है। सूर्य तेज, आत्मा, सम्मान, राज्य, सरकार, प्रराक्रम तथा क्रोध का प्रतीक है। पवित्र सूर्य कुण्डली सूर्य देव को इष्ट मानकर के ही बनाई गई है। वेदों में सूर्य देव की अराधना सर्वोपरि है। स्वयं सूर्य देव को भी भगवान विष्णु का साक्षात् रूप कहा गया है। यहां तक की गायत्री मंत्र भी सूर्य की अराधना में है, जो कि एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक मंत्र है! पारस भाई जी द्धारा रचित इस पवित्र सूर्य कुण्डली में मनुष्य के हर प्रकार के दुःखों का निवारण है। यह कुण्डली बाकी सभी कुण्डलियों से भिन्न है। पवित्र सूर्य कुण्डली की भाषा हिन्दी व सरल है। अतः इस प्रकार पवित्र सूर्य कुण्डली की विषेषताओं की व्याख्या करना संभव नहीं है। पवित्र सूर्य कुण्डली प्रत्येक मनुष्य के लिये पथ-प्रदर्षक है। पवित्र सूर्य कुण्डली हर व्यक्ति के लिए एक महत्वपूर्ण दर्पण है। पवित्र सूर्य कुण्डली में हर मनुष्य को उसकी इच्छाओं के मुताबिक हर चीज़ प्राप्त है। पवित्र सूर्य कुण्डली स्वयं ‘‘पारस गुरूजी’’ के विचार प्रधान कुण्डली है। इस प्रकार यह कुण्डली हर व्यक्ति के लिए आवश्यक कुण्डली है। क्योंकि इसमें दिये गये उपाय भी काफी सस्ते व टिकाऊ व सरल है। इस पवित्र सूर्य कुण्डली की उपयोगिता जितनी मानों उतनी ही कम है। अतः इस प्रकार पवित्र सूर्य कुण्डली हर व्यक्ति के लिए जरूरतमंद है क्योंकि ‘‘पारस गुरूजी’’ ने पवित्र सूर्य कुण्डली जनसमूह के कल्याण के लिये ही बनाई है। आशा करते हैं कि यह पवित्र सूर्य कुण्डली आपकी भी पथ प्रदर्शक बनकर आपके जीवन को नई दिशा दें।

पवित्र सूर्य कुण्डली को जब आप आर्डर कर अपने घर मॅंगवाते है! तो आपको क्या करना चाहिए?

आपको मुबारक हो कि पवित्र सूर्य कुण्डली को आपने अपने जीवन का हिस्सा बनाया!! जिस प्रकार हम अपने घर आये मेहमान का आदर सम्मान करते है, ठीक उसी प्रकार पवित्र सूर्य कुण्डली के साथ हम स्वंय माता रानी को अपने घर बुला रहे है कि वह हमे जीवन मे बेहतर मार्ग दर्शन के साथ साथ हमे हमेशा दुखो से मुक्ति दे!! इसलिए याद रखे जब पवित्र सूर्य कुण्डली आपके घर आये! तो कुछ मीठा अवश्य लाए, जिसका थोड़ा हिस्सा खुद खाए व थोड़ा हिस्सा बच्चो व परिवार मे वितरण करें! जिससे परिवार मे माता सुख, शांति, बरकते और परिवार मे मिठास प्रदान करे!! पवित्र सूर्य कुण्डली को साफ जगह पर रखें! व पवित्र सूर्य कुण्डली को छूने से पहले हाथ अवश्य धोए! जब भी आप इसे पढ़े तो आप का साफ सुथरा होना बेहद जरूरी है क्योकि यह भी आपका भाग्य है और भाग्य की इज्जत करना भी अनिवार्य है!! क्योकि भाग्य ही जो हम कभी रूला देता है और कभी रोते हुए हँसा देता है!

!! पवित्र सूर्य कुण्डली को रखने की दिशा व उसके फायदे !!

यह दुनिया महाकाली की है और यह दुनिया महाकाली ही चला रही है! क्योकि वह ही शक्ति का प्रतिरूप है! वह वो शक्ति है जो आपमे, हमारे मे, दुनिया के हर जीवन जन्तु मे विधमान है और उसी शक्ति के कारण हम चलते है, बोलते है, सुनते है, देखते है और स्वाद का महसूस करते है! क्योकि वही प्राण वायु है! और वही दुख रूपी मौत से बचाने वाली है! इसलिए पवित्र सूर्य कुण्डली को दक्षिण मुख करके रखे क्योकि दक्षिण दिशा मे यमराज का द्वार होता है। व माता भद्रकाली इस द्वार से कोई भी बुरी आपदा नही आने देती। माता के दक्षिण दिशा की तरफ देखने के कारण व वहां से हर हारी बीमारी व आपदा रोकने के कारण माता को दक्षिणेष्वरी माता के नाम से भी जाना जाता है और उसी माँ काली को नमस्कार करते हुए भाग्य की दुनिया मे आपका स्वागत है! उम्मीद करते है कि पवित्र सूर्य कुण्डली आपके जीवन को नई दिशा दे

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