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                   पवित्र सूर्य कुण्डली

                                                                                
                                                                                                 पारस गुरू जी
विश्व विख्यात सर्वप्रसिद्ध गुरू श्री पारस भाई जी का जन्म पंजाब  के नवा शहर में हुआ। इनकी  प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में ही हुई।  इसके बाद इन्होंने दिल्ली के ही रामजस कालेज से डिग्री प्राप्त की। इनका नाम व इनके नाम का आश्रय ही इनकी पूरी छवि को दर्शाता है। पारस आश्रय एक पत्थर है। जो किसी को छूता है उसे सोना बना देता है। इन्होंने ज्योतिष विद्या मोरिशियस से ग्रहण की। इनका लक्ष्य लोगों को जोड़ना है। पारस गुरू जी ने ज्योतिष के साथ अध्यात्म को भी उजागर किया है। पारस गुरू जी प्रार्थनाओं में बहुत विश्वास रखते हैं। इनका मानना है। कि हर दुख-दर्द की दवा सिर्फ और सिर्फ प्रार्थना है। पारस जी की वाणी में एक अलग सी गरमाहट देखने को मिलती है। यह विश्व में पहले ऐसे गुरू हैं। जिन्होंने नशामुक्ति पर कार्य किया। यह गरीबों को अपना विशेष प्रोत्साहन देते हैं। बहुत से कार्य इनके कारगर सिद्ध हो चुके हैं। लेकिन बहुत से कार्य इनके कारगर सिद्ध होने बाकी हैं। यह गरीब बच्चों को शिक्षा में ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन देना चाहते हैं। और यह महिलाओं की काफी इज्जत करते हैं। गरीब व अशिक्षित लोगों के प्रति भी इनका विशेष प्रोत्साहन जारी है। इनके इसी छवि को देखते हुए यह आज विश्व भर में एक प्रसिद्ध गुरू के नाम से जाने जाते हैं। इनकी प्रशंसा शब्दों में करना तो शायद मुमकिन ही नहीं है। हर व्यक्ति इनको अपना गुरू बनाना चाहता है। अतः यह ज्योतिष विद्या की दुनिया के हीरो हैं। और अभी तो इनका आगाज़ है जो इतने कम समय में यह सबके दिलों पर छा गये हैं। तो अंजाम की तो कल्पना करना भी असंभव है।