“Pavitra surya kundli-Vedic astrology”

-जय माता दी-
जिस प्रकार हम अपने घर आये मेहमान का आदर सम्मान करते हैं, ठीक उसी प्रकार पवित्र सूर्य कुण्डली के साथ हम स्वयं माता रानी को अपने घर बुला रहे हैं कि वह हमें जीवन में बेहतर मार्गदर्शन के साथ-साथ हमें हमेशा दुःखों  से मुक्ति दें। इसलिए याद रखें जब पवित्र सूर्य कुण्डली आपके घर आये, तो कुछ मीठा अवश्य लायें जिसका थोड़ा हिस्सा खुद खायें व थोड़ा हिस्सा बच्चों व परिवार में वितरण करें। जिससे परिवार में माता सुख, शान्ति, बरकतें और परिवार में मिठास प्रदान करें। पवित्र सूर्य कुण्डली को साफ जगह पर रखें व छूनें से पहले हाथ अवश्य धोए। जब आप इसे पढ़ें तो आपका साथ सुथरा होना बेहद जरूरी है। क्योंकि यह भी आपका भाग्य है और भाग्य की इज्जत करना भी अनिवार्य है।

-पवित्र सूर्य कुण्डली को रखने की दिशा व उसके फायदे-
पवित्र सूर्य कुण्डली को दक्षिण मुख करके रखें क्योंकि दक्षिण दिशा में यमराज का द्वार होता है व माता भद्रकाली इस द्वार से कोई भी बुरी आपदा नहीं आने देती। माता के दक्षिण दिशा की तरफ देखने के कारण व वहाँ से हर हारी बिमारी व आपदा रोकने के कारण माता को दक्षिणेश्वरी माता के नाम से भी जाना जाता है और उसी माँ काली को नमस्कार करते हुए भाग्य की दुनियाँ में आपका स्वागत है। उम्मीद करते हैं कि पवित्र सूर्य कुण्डली आपके जीवन को नई दिशा दे।

क्या है पवित्र सूर्य कुण्डली ?
पवित्र सूर्य कुण्डली को ही आधार मानकर बनाई गई है क्योंकि सूर्य व्यक्ति के शरीर, सफलताओं, धन-वैभव और मान-सम्मान पर सभी ग्रहों से अधिक असर डालता है और सूर्य की कृपा के बगैर किसी भी प्रकार के मंगल की कल्पना मिथ्या है। पृथ्वी सहित अन्य सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। सूर्य तेज, आत्मा, सम्मान, राज्य, सरकार, पराक्रम तथा क्रोध का प्रतीक है। पवित्र सूर्य कुण्डली सूर्यदेव को इष्ट मानकर के ही बनाई गई है। वेदो में सूर्यदेव की आराधना सर्वोपरि है। स्वयं सूर्यदेव को भी भगवान विष्णु का साक्षात रूप कहा गया है। यहाँ तक की गायत्री मंत्र भी सूर्य की आरधना में है, जो कि एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक मंत्र है।

-पवित्र सूर्य कुण्डली को समझने की विधि-
1- पवित्र सूर्य कुण्डली में सबसे आपका नाम, आपकी जन्मतिथि, आपका जन्मस्थान, आपकी राशि, आपका लग्न, आपका जन्म नक्षत्र, आपका पद आदि का विवरण दिया गया है। उसके बाद वाले पृष्ठ पर पवित्र सूर्य कुण्डली का चार्ट दिया गया है कि आपका कौन सा ग्रह कौन से नम्बर यानि भाव में है।
2- अगले पेज पर आपका कौन सा ग्रह कौन से घर में कितनी डिग्री पर बैठा है। वहाँ आपको चार बाॅक्स दिए गए है जिसमें लग्न कुण्डली, आपका नवांश, चंद्रकुण्डली और निर्णय भाव चलित बाॅक्स है। सभी में ग्रहों की स्थिति का विवरण है। अगर आपकी कुण्डली केवल वर्षफल वाली है तो यह पेज आपकी पवित्र सूर्य कुण्डली में नहीं होगा। उसके बाद एक पृष्ठ पर यह बताया है कि कौन सा ग्रह आपका शुभ और कौन से अशुभ साथ ही कौन सा ग्रह सोया हुआ है। अगर आपकी पवित्र सूर्य कुण्डली केवल वर्षफल वाली है तो यह पेज आपकी पवित्र सूर्य कुण्डली में नहीं होगा। इसके बाद लगभग 10 से 12 पृष्ठों पर आपकी पवित्र सूर्य कुण्डली के घरों के हिसाब से जो भी ग्रह जिस घर में बैठा हुआ है, उसकी बहुत सुन्दर व सटिक प्रेडिक्शन दी है कि आपके जीवन में आपके साथ क्या हो चुका है, क्या हो रहा है और क्या होने की संभावनाएं है।
और उन संभावनाओं और अपने जीवन की अभिलाषाओं को पूरा करने के लिए आपको किस ग्रह के उपाय करना चाहिए, साथ ही यह भी बहुत सुन्दर और बढ़िया तरिके से दिया गया है कि आप अपने ज्योतिष जीवन में कौन-कौन से ऋणों व दोषों से पीड़ित है कि जो आपको आगे ही नही बढ़ने दे रहे या आपकी प्रगति में रूकावटें डाल रहे हैं। जबकि आप कोई भी बुरा काम नहीं करते।
3- इसके बाद एक पेज होगा जिस पर यह लिखा होगा कि जो आपको पवित्र सूर्य कुण्डली बता रही है वह आपको शायद ही कोई और बता पाये। इसलिए इस पेज के उपाय जरूर और ध्यानपूर्वक करें। क्योंकि यहाँ आपके सभी दोषों के बारे में व उसके निवारण के बारे में लिखा होगा। कि दो ग्रह एक साथ, तीन ग्रह एक साथ या चार, पाँच, छह, सात, या आठ ग्रह एक साथ किसी एक घर में होंगे तो वह आपके व आपके परिवार पर क्या अच्छा व बुरा प्रभाव डालेंगे। और पवित्र सूर्य कुण्डली की ब्युटी यहीं खत्म नहीं होती। इसके आगे आपकी राशि के उपाय वाला पेज आता है जिस पर आपकी राशि, आपका भाग्यदायक ग्रह, आपका नीच ग्रह, आपका उच्च ग्रह और आपकी राशि के उपाय जोकि आपको जीवनभर करते ही रहना है और यह सब लिखें है। और ध्यान रहे कि यह उपाय आपको अपने भाग्य को पाॅलिश करने के लिए जीवनभर करते रहना है।
4- इसके बाद आता है आपका वर्षफल।
जी हां वर्षफल। जैसे कि हर साल किसी विद्यालय में क्लास टीचर बदलता रहता है। उसी तरह नौ ग्रहों में से एक ग्रह आपके जीवन को संचालित करता है और आपके भाग्य में बढ़ने या गिरनें में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यहाँ यह बताया गया है कि अमुक साल में यह ग्रह आपके जीवन में आयेगा और आपके जीवन में इस तरह से शुभ और अशुभ प्रभाव दे सकता है इसलिए यह उपाय अपनी राशि उपाय के साथ करते रहें तो हर वर्ष के उपाय व प्रेडिक्शन भी आपकी पवित्र सूर्य कुण्डली में दी गई है। इसके बाद आता है नजरदोष और उसके उपाय।
5- अंत में है आपकी पवित्र सूर्य कुण्डली का सार कि आपका कैरियर किस क्षेत्र में सेट होगा। आपका स्वास्थ्य, मूलोक यानि आपका लक्की नम्बर, आपके जीवन में बेहतरीन रंग आपका लक्की दिन, आपका लक्की ब्रह्मास्त्र, और आपको कौन सा रत्न पहनना चाहिए यानि कि आपके जीवन के सभी पहलुओं, आपके जीवन के अनसुलझे रहस्यों व सवालों के जवाब पवित्र सूर्य कुण्डली बहुत ही बेहतर तरीके से देती है। और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आपका पथ प्रदर्शन करती है। आप यकीन करें यह आसान से उपाय चमत्कारी तौर पर आपके जीवन को प्रकाशमय करते जाते हैं आपको पता भी नही लगता।
क्योंकि सुख-दुःख, अच्छे-बुरे दिन, लाभ-हानि, सफलता-असफलता हमारी जिन्दगी के अलग-अलग तरह के रंग है। समय-समय पर प्रत्येक मनुष्य को अनेकों प्रकार के सुख-दुःख भोगने पड़ते हैं। हालंाकि यह सभी हमारे इस जन्म और पूर्व जन्म के कर्मों का प्रभाव है। परन्तु हम इन उपायों से इनके दुष्प्रभावों को कम तो कर ही सकते हैं, हम उम्मीद करते हैं जिस कामना या कार्य को सम्पूर्ण करने हेतु आपने अपनी व अपने परिवार की पवित्र सूर्य कुण्डली का निर्माण करवाया है, उस लक्ष्य को प्राप्त करवाने में हम आपकी मदद कर पायें।

हमेशा आपके दुःखों में आपका साथ और आपके सुखों में आपसे दूर खड़ा आपके और आपके परिवार की खुशियों के लिए हमेशा दुआएं मांगता हुआ कि आपके उपर कभी माता रानी दुःख की परछाई और आपके चेहरे पर गर्म हवा भी माता न लगने दे।


-आपका पारस परिवार-
जय माता दी आपको।

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